Tuesday, March 10, 2026

बीता समय यों आए

 बीता समय यों आए

 

1

सौ के ऊपर पैट्रोल,

मोटर का क्या काम।

बीता समय यों आए,

हाथ साइकिल थाम।

 

2

उड़े सिलेंडर गगन में,

कीमत जैसे गैस।

गोबर छाब चूल्हे पर,

घर में पालो भैंस।

 

3

घृतं दूध की नदी बहे,

गोधन है अनमोल।

रामू शामू खींचे हल,

डीजल खर्चा गोल।

 

4

रोटी होए सात्विक,

पके उपले आग 

धरती से मानव जुड़े,

गाए जीवन राग।

 

5

गौरव किया अतीत पर ,

करते संस्कृति नाज 

क्या मालूम इसी तरह,

 जाए प्रभुराज    

 

०००

 

ब्रजेश कानूनगो

 

Sunday, March 1, 2026

रंगोत्सव पर कुछ दोहे: प्रेम गंध उपहार

 रंगोत्सव पर कुछ दोहे:प्रेम गंध उपहार



टेसू प्रांतर में खिले,बहने लगी बयार।
गुझिया घर में बन चुकी, सजने लगा बजार।

फागुन यों लेकर आए ,खुशियों का त्योहार।
गांव बस्ती भगोरिया, प्रेम गंध उपहार।

ढोल मंजीरे ज्यों बजे, त्यों नाचे मन मोर।
इक दूजे रंग फैंकते बच्चे करते शोर

धनराज के माथे पर, भीखू मले गुलाल।
रामाजी की ढोलक पर, थिरके खान कमाल।

पिछले बरस अम्मा गई, बाबा भए उदास।
रंग लिए छोटी पोती, पुनः जगाए आस।

गिरे न स्याही पर्व पर, विस्मृत इसकी रीत।
इंद्रधनुष से रंग खिलें, रहे हमेशा प्रीत।

लोकतंत्र में होली पर, घुटे नेह की भांग।
कुर्सी का मद ना चढ़े बस इतनी सी मांग।

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ब्रजेश कानूनगो